Tuesday, November 01, 2011

छठिके आइ सँझुका अर्घ, नेपाल भारतक बिभिन्न ठाममे मनाओल जाऽ रहल


जनकपुरधाम, कार्तिक १५ मिथिलाञ्चलक पवित्र पावनि छठि विधि विधान सहित नेपाल भारतक बिभिन्न ठाममे मनाओल जाऽ रहल अछि

परिबारक सुख, शान्ति, कल्याण, आ  रोगसँ मुक्ति तथा बिभिन्न मनोकामना पुरा होबक जनबिश्वासक साथ श्रद्धा भक्ति पुर्बक छठि पाबनि मनाओल जाईत अछि।

अहि पावनिके शुरुवात मुख्य रुपसँ २ दिन आगुएस होइतो सझुका अर्घसँशुरु कएल गेल पुजासँ छठिक शोभा बढैत अछि । आइ साँझ डुबैत सूर्यके अर्घ्य दऽ छठि मनाओल जाऽ रहल अछि । आई सौंझका अर्घ दिन डुबैत सुर्यके ठकुवा, भुसबा, केरा,  सहितक मिष्ठानसभके अर्घ देल जाएत तऽ काल्हि उगैत सुर्यके अर्घ देल जाएत ।

मूल पूजा आइ सॉझसँ सुरु होइतो बितल रातिएसँ  श्रद्धालुसबहक पवित्र घाटसबमे जाएके क्रम शुरु भऽ चुकल अछि भिन्सर आठ वजेधरि जनकपुरक गंगासागर, धनुषसागर, अंगराजसर, दशरथ तलाव सहितक पोखरिसबहक घाटसब भरि गेल छल ।

दिवसीय छठि पूजाक चारिम दिन काल्हि भिन्सर गैत सूर्यके अर्घ्य दऽ इ पावनिक मापन हाएत । पावनिके पहिल दिन व्रती महिला पुरुष पवित्र जलाशयम स्नान कऽ अरवा अरवाईन एने छल अहिना काल्हि दिन भरि उपवास रहि सामे मिठासँ बनल खीर पुरीक प्रसाद चढा परिवार सहित खएने छल । जाहिके स्थानीय भाषाम खरना सेहो कहल जाइत अछि खरनाक बाद निराहार रहल व्रतालुसब काल्हि भिन्सर उगल सूर्यके अर्घ्य दऽ छठिके कथा श्रवण कऽ अन्नजल ग्रहण करत ।

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